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Tuesday, 6 May 2014

हाइकु-- मासूम चंचल बेटियाँ

कुछ हाइकु मासूम चंचल बेटियों के लिए ...

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सुन नादान
ईश्वर वरदान
बेटी संतान

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छू लें आसमाँ
करें नाम रौशन
दें, जो हौसला

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एक ही चाह
नापे धरा गगन
बेटी शगुन

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नाजों से पली
चढ़ी दहेज बलि
मासूम कलि

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नाजुक कंधें
ढ़ेर जिम्मेदारियाँ
ढ़ोती बेटियाँ

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प्रवीन मलिक
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Thursday, 1 May 2014

सम्मान के हकदार श्रमिक

हर कोई अपने स्तर पर श्रमिक है और पसीना बहाना श्रमिक की पहचान है पर हर स्तर पर श्रमिक को सम्मान नहीं मिलता यदि आप अपने उच्च अधिकारी से सम्मान की अपेक्षा रखते हैं तो आपका भी फर्ज है अपने निम्न स्तर के श्रमिकों को उचित सम्मान देना .... आखिर खून पसीना बहाते हैं भले ही अपने पेट के लिए पर उनका सहयोग हर स्तर पर मायने रखता है और विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है !
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कर्कश वाणी
सहना मजबूरी
सब हैं जाणी
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पेट की आग
जलाए हरपल
कैसे अभाग
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सूखा शरीर
श्रम है मजबूरी
न हो अधीर
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थोड़ा सम्मान
श्रमिक हकदार
जरा ले जान
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नन्हें श्रमिक
खो रहे बचपन
सुनो धनिक
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रद्दी बीनता
वो बाल मजदूर
पेट की चिन्ता
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प्रवीन मलिक 

पधारने के लिए धन्यवाद