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Thursday, 7 August 2014

राखी पर लें प्रण .....

" यही प्रण लेना और देना ,
राखी का मान-सम्मान बढ़ाना"

प्रेम के धागे
शायद कच्चे हो गये
या फिर अपना
महत्व खोने लगे हैं
एक डोरी में बंधा
प्रेम-विश्वास, दुआयें और सम्मान
कहीं न कहीं कमजोर हो रहा है
वरना हर दिन यूँ
बहने डर डरके न जीती
एक तरफ श्रीकृष्ण ने
द्रौपदी की लाज बचायी
एक कच्चे धागे से ही
खत्म न होने वाला चीर बनाया
तब तो दुशासन एक था
आज हर गली हर नुक्कड़ पर
दुशासनों का डेरा है
और कोई कृष्णा भी तो नहीं
अब बहनों को भाई से
खुद की रक्षा की नहीं बल्कि
संपूर्ण नारी-जाति के
सम्मान की रक्षा का प्रण लेना होगा
वचन लेना होगा कि
कभी किसी पर कुदृष्टि न डालें
वरना बेइज्जत वो पीडित नहीं
बल्कि मेरी राखी और मेरा विस्वास होगा !!

प्रवीन मलिक ••••••@•••••

5 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (08.08.2014) को "बेटी है अनमोल " (चर्चा अंक-1699)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. गजब का लेखन
    प्रण भी जरूरी है पर कसूरवार भाई को सजा मिले तो आंसू तक ना निकले
    ये हौसला भी हमारी देश की माताओं बहनों में हो :)

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  3. बहुत सुंदर ...रक्षाबंधन की शुभकामनायें

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पधारने के लिए धन्यवाद