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Monday, 18 February 2013

ना मन का कोई मीत मिला .....

अपने सब बेगाने हो गए , न किसी का साथ मिला !
सब सपने टूट गए , गम का कुछ ऐसा साथ मिला !!


तनहाइयों ने दी पनाह , तो सोचने का अवसर मिला !
अब सोच को देना था रूप , पर न कोई मंच मिला !!


अपने में ही खोये रहे , ना मन का कोई मीत मिला !
अपना बनके जो भी मिला , उसने जी भर के ठगा !!


इंसानों की इस बस्ती में , ना कोई ऐसा इंसान मिला
इंसानियत की तो बात क्या , बस शैतान का ही रूप मिला !!


खुदगर्ज भरी इस दुनिया में , न सच्चा कोई शख्श मिला !
अपनेपन का ढोंग लिए , हर कोई झूठा शख्श मिला !!


मीठे थे बस बोल , दिल में तो था ज़हर घुला ,
जिसको हमने हीरा समझा वो तो बस चमकीला पत्थर निकला !!



................................................ प्रवीन मलिक  

15 comments:

  1. वाह बेहद प्रवीन जी वाह बेहद सुन्दर एवं भाव पूर्ण प्रस्तुति.

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-02-2013) के चर्चा मंच-1165 पर भी होगी. सूचनार्थ

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    1. आपके स्नेह के लिए हार्दिक आभार अरुण जी ...

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  3. सुन्दर प्रस्तुति.

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    1. स्वागत है श्रीमान जी ...

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  4. बहुत उम्दा पंक्तियाँ ..भाव पूर्ण रचना ... वहा बहुत खूब
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

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    1. धन्यवाद दिनेश पारीक जी ...

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  5. बेहद भावपूर्ण रचना...
    कृप्या मेरे ब्लॉग पर भी पधारें
    http://kaynatanusha.blogspot.in
    धन्यवाद

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    1. धन्यवाद अनुषा जी ...
      जरुर जायेंगे आपके ब्लॉग पर भी ...

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  6. ऐसा ही होता है

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    1. सादर धन्यवाद ओंकार जी ...

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  7. अपने में ही खोये रहे , ना मन का कोई मीत मिला !
    अपना बनके जो भी मिला , उसने जी भर के ठगा !!..

    सच कहा है ... आजकल अपने ही ठगते हैं ... सच्चे मीत का मिलना आसान नहीं ... किस्मत वालों को ही मिलते हैं ...

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  8. hmm.........to ye baat...
    अपने सब बेगाने हो गए , न किसी का साथ मिला !
    सब सपने टूट गए , गम का कुछ ऐसा साथ मिला !!

    खुदगर्ज भरी इस दुनिया में , न सच्चा कोई शख्श मिला !
    अपनेपन का ढोंग लिए , हर कोई झूठा शख्श मिला !!

    har koi jhutha nhi hota,,,,,,, achhi rachna..........

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  9. खुदगर्ज भरी इस दुनिया में , न सच्चा कोई शख्श मिला !
    अपनेपन का ढोंग लिए , हर कोई झूठा शख्श मिला !!

    achha likha hai.....lekin har koi jhutha nhi hota mam,

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