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Tuesday, 12 March 2013

आज इंसान भी क्या से क्या हो रहे हैं !!



आज इंसान भी क्या से क्या हो गए हैं ,


इंसानों को छोड़ पत्थरों को खुश करने में लगे हैं !


कहीं भूख से तडपते हैं बच्चे ,


कहीं अनाजों के ढेर सड़ रहे हैं !


कहीं लगे हैं खुशियों के मेले ,


कहीं पर इंसान रो रहे अकेले !



कहीं भगवान् के भजन हो रहे हैं ,


कहीं मातम के रुदन हो रहे हैं !



सब्र के सब बाँध टूट रहे हैं ,


क्रोध से आतंक सजग हो रहे हैं !



पाखंडियो की हो रही सेवा ,


घरों से बूढ़े बेघर हो रहे हैं !



इंसान सब इंसानियत छोड़ कर ,


जंगली-जानवरों से हैवान हो रहे हैं !



आज इंसान भी क्या से क्या हो रहे हैं !!



********* प्रवीन मलिक *******

5 comments:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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  2. बहुत ही भावपूर्ण दिल की आवाज.

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  3. सुंदर भावनायें और.बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

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  4. मुझे उस मंदिर से नफरत हो जाती है जहाँ छोटे बच्चे भीख मांगते है
    और लोग जो भग्त बने फिरते है उस पत्थर पर जिसे न भूख है न प्यास है
    करोड़ों का प्रसाद चढ़ा कर खुश हो जाते हैं।

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